Computer में Wifi का Password कैसे पता करे?
आप में से बहुत के दिमाग में ये खयाल जरुर आया होगा के WiFi ka password kaise pata kare. लोग धीरे धीरे technology के और अपना कदम बढ़ाते जा रहे है और आप जो चीज़ पहले सहरो में देखते थे, आज उन्हें गांवों में भी देख सकते हैं. Technology हमारी ज़िन्दगी को सरल बनाने के साथ साथ हमारा समय का बचत भी करता है. तो इसी लिए आज के बिसय में हम कुछ नया जानेंगे, जिसको पढ़ कर आपको मज़ा आ जायेगा और हर post की तरह कुछ सिखने को भी मिलेगा.


Computer मै WiFi Password Kaise Nikale?


अगर आपके पास एक computer है और आप उसका wifi password भूल गए है तो आप निचे दिए गए तरीके का इस्तिमाल करके पता कर सकते हैं.

1. अपने Computer को WIFI के साथ connect करे.
2. Taskbar में WiFi network के symbol के ऊपर Right-click करे. वहां पे लिखा होगा “Open Network and Sharing Center” उसके ऊपर click करें.
3. Change adapter Setting पे click करे.
4. अब आपको बहुत सारे network देखने को मिलेंगे जिस पर जिस WiFi Network के साथ आप connected उसके उपर right click करो और Status पे click करो.
5. Wireless Properties के उपर click करे.
6. अब security पे click करें.
7. वहां पे लिखा होगा Network security key वही आपका WiFi password है,अगर Password Hide है तो show Character पे click करें. अब password से enjoy करो.

Shiv Kumar Thursday, September 7, 2017
होलिका दहन एक कृ​षि हितार्थ यज्ञ है

*होलिका दहन एक कृ​षि हितार्थ यज्ञ है।*

होलिका दहन के नाम पर प्रदूषण आदि की मिथ्या वार्ता करने वाले धर्मान्तरण वाले लोग हैं। यह एक पूर्णत: यज्ञ है। अत: जिस समय होलिका दहन करें उस समय प्रयास करें कि होलिका उपलों की हो एवं उसमें कालेतिल, जौ, चावल, शक्कर व औषधियों भी भेंट करें। इसमें कालेतिल दोभाग, जौ,चावल व शक्कर तीनों एक एक भाग तथा औषधियाँ एक भाग होता है। औषधियों में अग्रलिखित औषधियाँ हैं जिन्हें उप​लब्धि या मूल्य के हिसाब से 20 ग्राम से 50 ग्राम तक ले सकते हैं। छरीला या सर्वोषधि, अगर, तगर, जाफर, जावित्री, लवंग, इलायची छोटी व बड़ी, गूगल, तालसी पत्र, नागकेशर, घोड़ावच, इन्द्रजौ, नागरमोथा, जटामांसी, अश्वगंधा, गुलाबपुष्प, नीमगिलाय, दालचीनी, पद्माख, सुगंधकोकिला, बालछड, शतावरी, दारूहल्दी, आम्बाहल्दी, सामान्य हल्दी, लालाचन्दन, श्वेत चन्दन, कर्पूरकाचरी, पितपापड़ा। इनको दरदरा करके मिलालें एवं इसी भार के चावल जौ शक्कर व इसके दुगुने वजन के काले तिल। पुन: इसमें आधाभाग सूखा नारियल कदूकस करके मिलाएँ एवं सामग्री अनुसार न्यूनतम 50 ग्राम देशी घी मिलाकर तैयार करें एवं जिस समय होलिका का पूजन करें उस समय इसे। होलिका में भेंट करें।

होलिका दहन एक कृ​षि हितार्थ यज्ञ है

होलिका दहन के नाम पर प्रदूषण आदि की मिथ्या वार्ता करने वाले धर्मान्तरण वाली गुण्डी गैंग के लोग हैं। इनका उद्देश्य ही भारतीय धर्म एवं संस्कृति को नष्ट करना है। इसी कारण ये भारतीय उत्सवों का उपहास उढ़ाते हैं अथवा उनमें दोष ढूँढते हैं।

वस्तुत: होलिका एक पूर्णत: यज्ञ है। अत: जिस समय होलिका दहन करें उस समय प्रयास करें कि होलिका उपलों की हो एवं उसमें कालेतिल, जौ, चावल, शक्कर व औषधियों भी भेंट करें। इसमें कालेतिल दोभाग, जौ,चावल व शक्कर तीनों एक एक भाग तथा औषधियाँ एक भाग होता है। औषधियों में अग्रलिखित औषधियाँ हैं जिन्हें उप​लब्धि या मूल्य के हिसाब से 20 ग्राम से 50 ग्राम तक ले सकते हैं। *(1) छरीला या सर्वोषधि, (2)अगर, (3)तगर, (4)जाफर, (5)जावित्री, (6)लवंग, (7—8)इलायची छोटी व बड़ी, (9)गूगल, (10)तालसी पत्र, (11)नागकेशर, (12)घोड़ावच, (13)इन्द्रजौ, (14)नागरमोथा, (15)जटामांसी, (16)अश्वगंधा, (17)गुलाबपुष्प,(18)नीमगिलाय, (19)दालचीनी, (20)पद्माख, (21)सुगंधकोकिला, (22)बालछड, (23)शतावरी, (24)दारूहल्दी, (25)आम्बाहल्दी, (26)सामान्य हल्दी, (27)लालाचन्दन, (28)श्वेत चन्दन, (29)कर्पूरकाचरी, (30)पितपापड़ा, (31)नीम के पत्ते,(32) आँवला,(33)पंचमेवा,(34)केसर, (35) तालमखाना।* इनको दरदरा करके मिलालें एवं इसी भार के चावल जौ शक्कर व इसके दुगुने वजन के काले तिल। पुन: इसमें आधाभाग सूखा नारियल कदूकस करके मिलाएँ एवं सामग्री अनुसार या न्यूनतम 50 ग्राम देशी घी मिलाकर तैयार करें एवं जिस समय होलिका का पूजन करें उस समय इसे होलिका की प्रज्वलित अग्नि या अन्त में सुलगती लपटों  में भेंट करें।

इसका उद्देश्य समझने के लिये वैदिक विज्ञान विशारद पण्डित मधुसूदन ओझा जी के विचारों को समझना होगा। होलिका का समय है ऋतु परिवर्तन एवं नये अन्न उत्पन्न होने का ऐसे में भारतीय ऋषि जो कि सर्वज्ञ एवं क्रा​न्तदर्शी हैं उनसे भूल होने की संभावना नहीं हो सकती।

होली एक यज्ञ है उपरोक्त सामग्री के साथ जब होलिका दहन किया जाता है तो उससे सर्वप्रथम वहाँ का वातावरण शुद्ध होता है। यह समय मच्छरों के उत्पन्न होने का भी है तो  इससे बढ़ी मात्रा में हानिकारक विषाणुओं एवं मच्छरों का नाश होता है।

पुन: जब यह होली का धुँआ आकाश में जाता है तो पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण से बाहर नहीं चला जाता वह एक सीमा तक ऊपर उठ कर ठहर जाता है। होली के बाद दो परिवर्तन होते हैं। एक शीतला सप्तमी का उत्सव एवं दूसरा प्रकृति में ग्रीष्म ऋतु का आगमन

ग्रीष्म ऋतु के आगमन के सूर्य नारायण भगवान् अपनी सूर्य नाड़ियों से पृथ्वी के जल का शोषण करना प्रारम्भ करते हैं एवं यह जल भी ऊपर उठकर उसी स्थान पर जा कर ठहरता है जहाँ होली के औषधियों वाला धूँआ पूर्व में ही ठहरा हुआ है। वहाँ इसके कण जल के साथ मिलते हैं। एवं जब वर्षाकाल  आता है उस समय ये जल के साथ मिलकर पृथ्वी पर बरसते हैं। एवं इसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी पर दो तत्वों का शोधन होता है। प्रथमत: तो यह जल स्वयं ही शुद्ध एवं औष​धीय गुणों से युक्त होता है एवं द्वितीय यह जल पृथ्वी के जिस स्थान पर पड़ता है उसकी ऊपरी परत जिसे मृदा कहा जाता है उसे पोषण प्रदान करता है। यह मृदा तीनइंच तक की कही गई है एवं किसान व बैल द्वारा चलाए जानेवाले हल के अन्तर्गत तीन इंच की खुदाई होती है। इसके विपरीत ट्रेक्टर द्वारा की काश्तकारी से 6—9 इंच की खुदाई होती है जो कि हानिकारक है।

खैर यह होलिका एक प्रकार का यज्ञ है एवं इसके द्वारा सर्वप्रथम वायुमण्डल की शुद्धि तदुपरान्त जल एवं स्थल मण्डल की शुद्धि होती है। अत: यह पूर्णत: वैज्ञानिक एवं हमारे लिये हितकर है।

​होली के बाद सात दिवसों के भीतर शीलसप्तमी का पर्व आता है। यह पर्व चेचक को रोकने के ​उद्देश्य से मनाया जाता है। चेचक बहुधा बाल्यावस्था में होता है। ऐसे में होलिका समय में तैयार हुई राख का बहुत उत्तम उपयोग होता है। ग्रामीण अंचलों में आज भी परिपाटी है कि शील सप्तमी के दिन प्रात: छोटे छोटे बालकों की पूजा तिलक करके उन्हें एक वस्त्र लंगेाट पहना कर राख में लोटने के लिये कहा जाता है। एवं यह बड़े ही उत्साह के साथ किया जाता है। ऐसे में होलिका दहन के समय औषधियों के संयोग से बनी हुई राख का प्रयोग बालकों के शरीर में चेचक के टीकाकरण का प्रभाव रखती है। एवं बालकों में चेचक होने अथवा चेचक के महामारी के रूप में फैलने से रोकने के लिये अच्छा व सशक्त योग है।

अत: यह होलिका व भारतीय संस्कृति का दूसरा वैज्ञानिक व मनुष्य के लिये सर्वाधिक उपयुक्त प्रमाण है। होलिका के द्वितीय दिवस धुलण्डी पर अगले आलेख में लिखेंगे

Shiv Kumar Saturday, March 11, 2017
आयकर के संबंध मे सामान्य जानकारी

🙏🏻
    आयकर के संबंध मे सामान्य जानकारी :-

👉यदि प्राप्त ब्याज रू0 10000=00 से कम है तो ब्याज के कालम मे शुन्य  अंकित करे अन्यथा शुन्य का अंकन नही
👉यदि  HOME LONE  लिया है तो आवास भत्ता से छूट नही मिलेगी ।
👉यदि मकान किराया एक लाख रुपये से कम है तो केवल मकान किराया रसीद लगेगी
और  एक लाख से अधिक है तो रसीद के साथ मकान मालिक के पैन कार्ड की छाया प्रति लगेगी
👉स्वंय के आवास मे निवास करने वाले को आवास भत्ता से छूट देय नही
👉Home lone के ब्याज के  अन्तर्गत  आधिकतम छूट दो लाख रुपये है
👉Home lone संयुक्त होने पर मूलधन  और ब्याज आधा किया जायेगा
👉दो home lone पर छूट प्राप्त होगी
👉चिकित्सा बीमा स्वंय  या आश्रित के लिए सामान्य लिए  रू0  25000=00 वरिष्ठ के लिए  रू0 30000=00 अधिकतम छूट
👉गम्भीर रोग से पीड़ित स्वंय  या आश्रित के लिए सामान्य लिए  रू0 40000=00 वरिष्ठ के लिए  रू0 60000=00 अधिकतम छूट (10-I फार्म संलग्न करना अनिवार्य )
👉 स्वंय या अश्रित  40%-80% तक विकलांग लोग के लिए रू0 75000=00 और 80%से अधिक विकलांग लोग के लिए रू0 125000=00 की छूट ।
👉NPS के  अन्तर्गत की गयी कटौती पर  अधिकतम छूट रू0 50000=00
👉80C के अन्तर्गत अधिकतम छूट रू0 150000=00
👉बच्चो के विद्यालय  शिक्षण शुल्क पर ही छूट देय । कोचिंग के शुल्क पर छूट देय नही है ।

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    आयकर के संबंध मे सामान्य जानकारी :-

👉यदि प्राप्त ब्याज रू0 10000=00 से कम है तो ब्याज के कालम मे शुन्य  अंकित करे अन्यथा शुन्य का अंकन नही
👉यदि  HOME LONE  लिया है तो आवास भत्ता से छूट नही मिलेगी ।
👉यदि मकान किराया एक लाख रुपये से कम है तो केवल मकान किराया रसीद लगेगी
और  एक लाख से अधिक है तो रसीद के साथ मकान मालिक के पैन कार्ड की छाया प्रति लगेगी
👉स्वंय के आवास मे निवास करने वाले को आवास भत्ता से छूट देय नही
👉Home lone के ब्याज के  अन्तर्गत  आधिकतम छूट दो लाख रुपये है
👉Home lone संयुक्त होने पर मूलधन  और ब्याज आधा किया जायेगा
👉दो home lone पर छूट प्राप्त होगी
👉चिकित्सा बीमा स्वंय  या आश्रित के लिए सामान्य लिए  रू0  25000=00 वरिष्ठ के लिए  रू0 30000=00 अधिकतम छूट
👉गम्भीर रोग से पीड़ित स्वंय  या आश्रित के लिए सामान्य लिए  रू0 40000=00 वरिष्ठ के लिए  रू0 60000=00 अधिकतम छूट (10-I फार्म संलग्न करना अनिवार्य )
👉 स्वंय या अश्रित  40%-80% तक विकलांग लोग के लिए रू0 75000=00 और 80%से अधिक विकलांग लोग के लिए रू0 125000=00 की छूट ।
👉NPS के  अन्तर्गत की गयी कटौती पर  अधिकतम छूट रू0 50000=00
👉80C के अन्तर्गत अधिकतम छूट रू0 150000=00
👉बच्चो के विद्यालय  शिक्षण शुल्क पर ही छूट देय । कोचिंग के शुल्क पर छूट देय नही है ।

Shiv Kumar Saturday, February 25, 2017
How to get relaxation of arrear income in income tax return

यदि आपको इस वर्ष नियमित वेतन आय के साथ बकाया (एरियर) के रूप में पिछले वर्षों का वेतन भी प्राप्त हुआ हो तो आपको टैक्स के रूप में बहुत बड़ी रकम चुकानी पड़  सकती है।  यह पैसा सेलरी खाते में टैक्सेबल है। पर चूंकि शिक्षकों को इसके बारे में पता नहीं था, इसलिए उनको कुछ राहत मिल सकती है। इसके लिए इनकम टैक्स की धारा 89(1) का फायदा मिल सकता है। पर ये सेक्सन बहुत ही जटिल है। इसमें सीधे-सीधे कोई हिसाब लगाना मुश्किल है। फिर भी बचत का रास्ता निकल आता है।

शिक्षकों  को जो एरियर एकमुश्त मिल रहा है, वो उनकी आय को एकदम से बढ़ा देगा। इस वजह से टैक्स की देयता बहुत बढ़ जाती है। पर इसमें शिक्षकों  की कोई गलती नहीं है। दरअसल ये वो पैसा है, जो सरकार को बहुत पहले दे देना चाहिए था। मगर इसका भुगतान अब एक साथ किया जा रहा है। इसीलिए कानून में इससे बचने के लिए कुछ इंतजाम भी किए गए हैं।

एरियर को किस वर्ष की आय माना जाएगा? क्या इसे इसी वर्ष की आय मानकर कर निर्धारण होगा या जिस वर्ष के लिए मिला है उसी वर्ष की आय मानकर लागू किया जाएगा ? ऐसे प्रश्नों के जवाब यह है कि  मिलने वाले एरियर को इसी वर्ष की आय मानकर कर निर्धारण किया जाएगा।  चूंकि एरियर मिलने का समय तय नहीं होता है इसलिए उसे उसी समय की आय माना जाता है जिस समय वह कर्मचारी को मिलता है।

कैसे बचाएं धारा 89 (1) से कर
क्या आयकर अधिनियम की धारा 80 (1) के तहत मिलने वाले एरियर पर टैक्स में छूट मिल सकती है?  प्राइमरी का मास्टर ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि हां आप धारा (1) के तहत मिलने वाले एरियर पर टैक्स छूट के लिए दावा कर सकते हैं। मास्साब के अनुसार  सेक्शन 89 (1) के तहत शिक्षक भाई  कर के बोझ को कम कर सकते हैं। सवाल यह है  कि कैसे किया जाएगा कर निर्धारण और कैसे लागू किया जाएगा धारा 89 (1) को। बताते चले  कि इसके तहत टैक्स को दो हिस्सों में तय किया जाता है। पहला टैक्स निर्धारण आपकी आय और होने वाली अतिरिक्त आय को जोड़कर किया जाता है। दूसरे हिस्से को तय करने के लिए कुल आय में एरियर को जोड़ा जाता है। इन दोनों आय के अंतर के बराबर टैक्स में छूट दी जाती है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि अगर किसी करदाता की आय में मिलने वाले एरियर के मुताबिक वेतन बढ़ जाता है तो उसे अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करना होता है।

मान लीजिए छठे वेतन आयोग के मुताबिक वेतन बढ़ने से पहले उसे 10000  रुपए बतौर टैक्स देना होता था और आयोग की सिफारिशों के लागू होने पर 11500  रुपए टैक्स देना पड़ेगा। अब दो साल के एरियर के मुताबिक उसे यह अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़े तो आयकर अधिनियम की धारा 89 (1) के तहत उसे इस अतिरिक्त टैक्स राशि का भुगतान नहीं करना होगा। मान लीजिए शिक्षक पद पर कार्यरत मास्साब  को चालू वित्त वर्ष में बतौर एरियर 2 लाख रुपए मिलते हैं।विभाग  ने यह एरियर उसे पिछ्ले वर्ष के बकाया वेतन/भत्तों  के तौर पर दिया है। अब मान लीजिए मास्साब  को अपने वेतन के मुताबिक 2,00,000 रुपए पर टैक्स का भुगतान करना होता है। मगर मिले हुए इस एरियर  के कारण उसकी कर योग्य आय बढ़कर 2,40,000 रुपए हो गई है। इस बड़ी हुई एरियर आय को उनके वास्तविक वर्षों के अनुसार विभाजित करते हुए तत्समय इनकम स्लैब के अनुसार कर की गणना करते हुए इस एरियर को यदि उन वर्षों में समाहित कर लें तो उन वर्षों में बची हुई स्लैब के रकम से कर बचत की जा सकती है।
  भरे 10 ई फॉर्म
आपकी सहूलियत के लिए हमने केवल एक साल के एरियर के मुताबिक गणना समझाई है। हालांकि वास्तविकता में ऐसा हो सकता है कि आपको कई साल का एरियर मिला हो। ऐसी स्थिति में हर साल का अगल-अलग टैक्स निकालकर आप वास्तविक और अतिरिक्त टैक्स राशि पता कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि धारा 89 (1) के तहत मिलने वाली टैक्स छूट के कारण आपकी अंतिम टैक्स राशि भी कम हो जाती है। इसके साथ ही इससे आपके वेतन का टीडीएस भी कम हो जाता है। हर शिक्षक  को अपने विभाग  को फॉर्म 10 ई के जरिए कम टीडीएस काटने की जरूरत के बारे में बता देना चाहिए।

Shiv Kumar Friday, February 24, 2017
दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार

-- 20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णतः मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं | जी हाँ मिठाई भी ।।

--डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है ।
और एक ख़ास बात । चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।

--मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है ।

अतः आग्रह है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–

> 1 – गेंहू 100 gm.
> 2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
> 3 - जौ 100 gm.
> 4 - कलुन्जी 100 gm.

--( निर्माण विधि )

उपरोक्त सभी सामग्री को ५ कप पानी में रखें । आग पर इन्हें १० मिनट उबालें । इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।

--( उपयोग विधि )

सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं ...और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।
जिस किसी के पेरेंट्स को प्रॉब्लम हो उपयोग करे और आगे फॉरवर्ड करे साभार -

--यह अच्छा Msg है सब ग्रुप में Frwd कर दिया जाये,
तो काफी लोग फायदा उठा सकते है.... 🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃 इस  को मैने आप तक पहुंचाने मे  र्सिफ उंगली का उपयोग किया है
🙏🙏🙏

Shiv Kumar Thursday, February 23, 2017
कुछ रह तो नहीं गया ?

कुछ रह तो नहीं गया ?

3 महीने के बच्चे को दाई के पास रखकर जॉब पर जानेवाली माँ को दाई ने पूछा... कुछ रह तो नहीं गया?
पर्स, चाबी सब ले लिया ना?
अब वो कैसे हाँ कहे?
पैसे के पीछे भागते भागते... सब कुछ पाने की ख्वाईश में वो जिसके लिये सब कुछ कर रही है ,
*वह ही रह गया है.....*

शादी में दुल्हन को बिदा करते ही
शादी का हॉल खाली करते हुए दुल्हन की बुआ ने पूछा..."भैया, कुछ रह तो नहीं गया ना?
चेक करो ठीकसे ।
.. बाप चेक करने गया तो दुल्हन के रूम में कुछ फूल सूखे पड़े थे ।
सब कुछ तो पीछे रह गया...
25 साल जो नाम लेकर जिसको आवाज देता था लाड से...
वो नाम पीछे रह गया और उस नाम के आगे गर्व से जो नाम लगाता था
वो नाम भी पीछे रह गया अब ...

"भैया, देखा?
कुछ पीछे तो नहीं रह गया?"
बुआ के इस सवाल पर आँखों में आये आंसू छुपाते बाप जुबाँ से तो नहीं बोला....
पर दिल में एक ही आवाज थी...

*सब कुछ तो यही रह गया...*

बडी तमन्नाओ के साथ बेटे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था और वह पढ़कर वही सैटल हो गया ,
पौत्र जन्म पर बमुश्किल 3 माह का वीजा मिला था और चलते वक्त बेटे ने प्रश्न किया सब कुछ चैक कर लिया कुछ रह तो नही गया ?
क्या जबाब देते कि
*अब छूटने को बचा ही क्या है ....**

60 वर्ष पूर्ण कर सेवानिवृत्ति की शाम पी ए ने याद दिलाया चेक कर ले सर कुछ रह तो नही गया ;
थोडा रूका और सोचा पूरी जिन्दगी तो यही आने- जाने मे बीत गई ; *अब और क्या रह गया होगा ।*

कुछ रह तो नहीं गया?
" शमशान से लौटते वक्त किसी ने पूछा । नहीं कहते हुए वो आगे बढ़ा...
पर नजर फेर ली,
एक बार पीछे देखने के लिए....पिता की चिता की सुलगती आग देखकर मन भर आया ।
भागते हुए गया ,पिता के चेहरे की झलक तलाशने की असफल कोशिश की और वापिस लौट आया ।।

दोस्त ने पूछा... कुछ रह गया था क्या?

भरी आँखों से बोला...
*नहीं कुछ भी नहीं रहा अब...और जो कुछ भी रह गया है वह सदा मेरे साथ रहेगा* ।।

एक बार समय निकालकर सोचे , शायद पुराना समय याद आ जाए, आंखें भर आएं और आज को जी भर जीने का मकसद मिल जाए।
........में अपने सभी दोस्तों से ये ही बोलना चाहता हूँ.......
यारों क्या पता
कब इस जीवन की शाम हो जाये.......
इससे पहले ऐसा हो सब को गले लगा लो दो प्यार भरी बातें करलो.....

*ताकि कुछ छूट न जाये।।।।।*

Shiv Kumar Friday, February 3, 2017
25 हजार पदों पर चयन ही अधूरा, 72825, 29334, 15000 ,16448 व् उर्दू भर्तियों में खाली हैं 25000 पद

25 हजार पदों पर चयन ही अधूरा

धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद : सूबे की लंबित भर्तियों में चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटने के निर्देश हुए हैं। अन्य विभागों की तुलना में बेसिक शिक्षा परिषद में नियुक्तियों की तस्वीर बिल्कुल अलग है। पिछले तीन वर्षो में शिक्षकों की यहां नौ भर्ती प्रक्रिया शुरू हुईं। उनमें तीन लाख पांच हजार 457 नियुक्तियों के सापेक्ष दो लाख 79 हजार 530 नियुक्तियां भी हुईं, लेकिन अब भी 25 हजार 927 पद खाली हैं। यह पद सभी भर्तियों में अवशेष बचे हैं। इसमें कुछ विशेष आरक्षित वर्ग के हैं वहीं अधिकांश पद इसलिए खाली रह गए कि भर्ती का प्रकरण न्यायालय की चौखट लांघ गया। यह पद कब भरे जाएंगे और किसे नियुक्ति पत्र मिलेगा यह भविष्य के गर्भ में है।

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 72825 शिक्षकों की भर्ती हो या उच्च प्राथमिक स्कूलों में 29334 शिक्षकों की भर्तियां। इनकी भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए दो साल बीत रहे हैं अब तक यह पूरी नहीं हो सकी हैं। 72 हजार शिक्षक भर्ती में करीब आठ हजार तो 29 हजार भर्ती में लगभग चार हजार पद रिक्त हैं। नियुक्ति संबंधी विवाद होने पर इनके प्रकरण न्यायालयों में पहुंचे तो भर्ती जहां की तहां ठप हो गई। इसी तरह शिक्षा विभाग में उर्दू भर्ती, बीटीसी भर्ती व समय-समय पर शुरू होने वाले अन्य नियुक्तियों में तमाम पद रिक्त हैं। उनको भरने का न प्रयास हो रहा है और न ही किसी को इसकी चिंता है। अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि अधिकांश रिक्त पद विशेष आरक्षित वर्ग के हैं, जब इन पदों के लिए उस वर्ग के अभ्यर्थी नहीं आए हैं तो उन्हें कैसे भरा जाएगा।

नई नियुक्तियों में ही नहीं समायोजित शिक्षकों के प्रकरण में भी अभ्यर्थी छूटे हैं। प्राथमिक विद्यालयों में एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित कर दिया गया है, लेकिन करीब 32 हजार शिक्षामित्र अब भी समायोजन की राह देख रहे हैं।

16645 भर्तियां जहां की तहां ठप : राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड शिक्षकों के 6645 पदों पर भर्ती के लिए 29 अक्टूबर 2014 को शासनादेश जारी हुआ। इसमें युवाओं से मंडल स्तर पर आवेदन मांगे गए। एक ही अभ्यर्थी के कई मंडलों में आवेदन करने के कारण मेरिट सूचियों में लगातार बदलाव होता रहा। जिनका चयन हुआ उनमें से बड़ी संख्या में ऐसे भी थे जिनके अंकपत्र जांच में फर्जी मिले। लिहाजा 2100 पदों पर ही चयन हो पाया। अब शेष पदों पर नई नियमावली के तहत चयन किया जाएगा।

अभी चयन कार्य शुरू नहीं : अशासकीय माध्यमिक कालेजों के लिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड शिक्षकों का चयन कर रहा है। पिछले छह माह से सिर्फ 2013 का चयन चल रहा है, जबकि 2011 की चयन प्रक्रिया अभी शुरू होना शेष है। वहीं, टीजीटी-पीजीटी 2016 की परीक्षा तक अभी नहीं कराई जा सकी है

Shiv Kumar Saturday, December 10, 2016
Vedic method to solve maths Mentally
List of Some faster way (vedic methods) to solve maths. 


1.  Multiplying Numbers Close to Base 10 -fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=mk4ldUxPvt8

2.  Multiplying Numbers Close to Base 20 (above) - fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=aYz9XoQ0pzk


3.  Doubling Trick to Mentally Find the Times of any Number - fast trick (vedic      maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=IzSWkrLGE1Y

4.  Mental Subtraction Jumping 10's (down)- fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=Pv39oE2y6dE

5.  Mental Adding Jumping 10's (up)- fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=eTHPTu2J-HQ

6.  Special Trick of Multiplication (vedic maths trick)
    https://www.youtube.com/watch?v=mbUGuGboQ0E

7.  Direct Multiplication 2 digit number x 2 digit number- fast trick (vedic     maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=qGEtfx1ZU-k

8.  Multiply any Number with Numbers from 11-20- fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=abXlbnYqMno

9.  Multiply any Number with 11 - fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=0E9vZuYYbds

10. Multiply any Number with Numbers from 1-9 - fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=S_JeeQxj4VE

11. Multiply any 2 Digit Number with 11 - fast tric (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=m0LjKswxhVo

12. Multiplying Numbers Close to Base 100 above - fast trick(vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=-auEw8Aezjw

13. Easily Find Cube root from 1 to 100 fast trick (vedic maths)
    https://www.youtube.com/watch?v=bgDy9xLoInk

14.  EasyCal Cubing Trick 2 - To Easily Find Cubes from 1-100

https://www.youtube.com/watch?v=LSjybQNRTiM

Shiv Kumar Friday, December 9, 2016
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Shiv Kumar
नोट बंदी क्यों था जरुरी?

*नोट बंदी क्यों था जरुरी?*

रूपये का कागज तैयार करने के लिए दुनिया में 4 फ़र्म हैं -

1. फ्रांस की अर्जो विगिज
2. अमेरिका का पोर्टल
3. स्वीडन का गेन
4. पेपर फैब्रिक्स ल्युसेंटल

बड़ी बात यह है कि इनमें से दो फोर्मो का 2010-11 में पाकिस्तान के साथ भी रूपए के कागज का अनुबंध हो चुका है जिसका भारत ने विरोध भी किया था, अर्थात नोट छापने के लिए जो कागज भारत लेता था वही कागज 2010 से पाकिस्तान भी ले रहा है, फलस्वरूप पाकिस्तान उस कागज के अधिकतम हिस्से का इस्तेमाल भारतीय रूपए(नकली नोट) छाप कर भारत मे भेजने का काम कर रहा है|
RBI के मुताबिक भारत में लगभग 16000 खरब डालर मूल्य के रुपए असली है, इंडियन इन्टेलिजेन्स एजेंसीज के मुताबिक पाकिस्तान 15000 खरब डालर नकली भारतीय रूपया छाप कर भारत में सप्लाई करने के लिए तैयार बैठा हैं जो कि 0% Error हैं (पूरी तरह असली के समान, जिसे पहचान पाना असम्भव था)| अर्थात लगभग पूरे भारतीय रूपया के 98% नकली नोट भारतीय बाजार में आने को तैयार थे| अगर वे नोट बाजार में आ जाते तो अचानक मुद्रास्फीति लगभग दो गुनी बढ़ जाती, महंगाई दो गुनी बढ़ जाती|

इसीलिए मोदी जी ने आनन-फानन मे अब जर्मनी के एक प्रिंटिंग प्रेस से कागज लेने का अनुबंध किया| साथ ही ये भी अनुबंध किए कि ये कागज जर्मनी किसी अन्य को नहीं दे सकता, ताकि भविष्य में फिर कभी नकली नोट की समस्या भारत में न हो सके| ये कागज पहले वाले से बहुत हल्का और अधिक सुरक्षित हैं, ये पानी, धूप से खराब नही हो सकता|

आनन-फानन में उन्हें 500-1000 रूपए के नोट को बन्द करना पड़ा| बेशक जनता को 10 दिन विकट समस्या को झेलना पड़ रहा है लेकिन इसके फायदे को भी देखे...!

1- नकली नोट की समस्या भारत से हमेशा के लिए समाप्त
2- ब्लाक मनी भी ना के बराबर हो जाएगा| (ब्लाक मनी का अर्थ है कि वो पैसा जो बाजार में नहीं दौड़ रहा और किसी की तिजोरी में भण्डारण हुआ था),
3- कालाधन कमाने का रास्ता ब्लाक हो गया,
4- पहले से मौजूद कालाधन 65% से अधिक खराब हो जाएगा| (बचे 35% कालाधन नोट के शक्ल में नहीं है),
5- हवाला का धन्धा खत्म,
6- विदेशी बैंको मे जमा कालाधन बेकार हो जाएगा, कैशलेस इकाँनमी को मजबूती मिलेगी,

और भी बहुत प्रकार के फायदे धीरे-धीरे सामने आने वाले हैं। पीएम मोदी के इस साहसपूर्ण क़दम की पूरी दुनिया में भूरि-भूरि प्रशंशा हो रही है।

आइए, हम अपने बच्चों के लिए एक उज्जवल भारत बनाने में महानायक का साथ दें। वन्देमातरम।
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मित्रों,,,,,,😀
सभी से निवेदन है इस जानकारी
को इंडिविदुअल्स और ग्रुप में फारवर्ड करें ताकि लोगों के मन में गलत जानकारी घर न कर बैठे और लोग 10   15 दिन की परेशानी का इतना बड़ा फायदा को समझ न पाएं
So plzzz forward ahead
For your better future and for your next generation🙏🏻

Shiv Kumar Tuesday, November 29, 2016

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